अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है अतीत का विकसित इटौंजा रेलवे स्टेशन बन गया है नशेड़ियों का ठिकाना

  • इटौंजा में रेलवे स्टेशन बनाने की मांग कर रहे हैं तिरंगा महाराज 14 फरवरी से करेंगे आंदोलन धरना प्रदर्शन

लखनऊ/ इटौंजा
रख रखाव के अभाव में उबड़ खाबड़, जर्जर अवस्था मे पहुंच चुके रेलवे कॉलोनी के सरकारी आवास व सीमावर्ती इटौंजा रेल पड़ाव पर पसरा सन्नाटा अपनी बदहाली पर आंसू बहाता हुआ नशेड़ियों का अड्डा बन विकास की बाट जोह रहा है।
उपेक्षा का शिकार हुआ यह लखनऊ जनपद का सीमावर्ती रेल पड़ाव किसी समय मे रेलवे स्टेशन के रूप में आसपास के जनपदों में बहु प्रसिद्ध हुआ करता था। प्रातः कालीन ट्रेन के साथ यहां यात्रियों/दैनिक यात्रियों का जमावड़ा लगना शुरू होता था जो दोपहर तक बदस्तूर जारी रहता था। दुग्ध व्यवसायी, वकील, पत्रकार, शिक्षक, छात्र, रोजगार/ स्वरोजगार से जुड़े लोग, दैनिक मजदूर, बीमार, तीमारदार आदि सभी की उम्मीद हुआ करती थी मीटर गेज रेलवे लाइन की ट्रेन। वह इन ट्रेनों से विकसित शहरों में जाकर अपना कार्य साधते थे। दोपहर के बाद उन्ही दैनिक यात्रियों की वापसी से इटौंजा रेलवे स्टेशन का चेहरा खिल जाता था। इसके अलावा तमाम यात्रियों के आवागमन का साधन ट्रेनें थी। समय बदला और विकास की बयार चली। और मीटर गेज से ब्राड गेज में परिवर्तन का फरमान रेलवे विभाग से आया। उस विकास की बयार में लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर, बरेली तक का सफर करने वाले क्षेत्रवासियों ने राष्ट्रीय राजधानी के ख्वाब बुनने शुरू कर दिए। छोटी लाइन ( मीटर गेज) उखाड़ कर बड़ी लाइन ( ब्राड गेज) बिछाने की तैयारी भी कर ली रेल विभाग ने। लंबे प्रयास के बाद मीटर गेज से ब्राड गेज हो हुई लेकिन इस बीच रेल विभाग ने इटौंजा रेलवे स्टेशन हटाकर हाल्ट बनाने की तैयारी कर ली। इस बात का विरोध भी हुआ, क्षेत्रीय नेताओ व जनप्रतिनिधियों ने रेल प्रशासन से मांग भी की लेकिन अन्तोगत्वा पड़ाव हाल्ट में तब्दील ही हो गया।
रेलवे स्टेशन बनाने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शुक्ला तिरंगा महाराज के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जोर पकड़ने पर रेल विभाग ने आश्वासन जरूर दे दिया कि भविष्य में इटौंजा को क्रासिंग स्टेशन बनाया जाएगा, लेकिन भविष्य की बात तो भविष्य के गर्भ में ही है।
वस्तु स्थिति यह है कि कभी इंसानी चहल पहल से जगमग रहने वाला यह रेल पड़ाव आवारा पशुओं का नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है शराबियों की आरामगाह बन चुका है। गिनी चुनी ट्रेनों के समय थोड़ी रौनक होती है। बाकी समय बंदर, कुत्तों का गैंग यहां कब्जेदारी की जुगत में रहता है। कभी कभी इन दोनों में गैंगवार होने पर इंसानों का निकलना भी दुर्लभ हो जाता है। शाम होते ही पड़ाव शांति के आगोश में आ जाता है। यहां धुप्प अंधेरे में पड़े रेल पड़ाव पर भय व शांति की पसरी रहती है।
इस रेल पड़ाव के ठीक पीछे बनी रेलवे कॉलोनी भी उजड़ चुकी है। लगभग दर्जन भर रेलवे आवास उजड़ चुके हैं। कोई कोई आवास तो जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। इस कालोनी में भी रात को खामोशी व भय की संयुक्त चादर फैल जाती है।कोई सुध लेने वाला नही है।
कुलमिलाकर रेल विकास की चली बयार से सीमावर्ती इस रेल पड़ाव इटौंजा का बंटाधार हो गया है। हाल्ट होने के बाद इटौंजा रेल पड़ाव की मानो रौनक चली गयी हो। हजारों की तादात में जुटने वाले यात्री, दैनिक यात्री अब दर्जनों में आ टिके हैं। रेलकर्मियों की कमी से रेलवे कालोनियां उजड़ गयीं। साथ ही रख रखाव के अभाव में रेल अधिकार क्षेत्र में पड़ने वाले मार्ग जर्जर अवस्था मे पहुंचकर विकास की बाट जोह रहे हैं। समाजसेवी तिरंगा महाराज ने मांग की है कि इटौंजा को पुनः रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किया जाय।
और इसके लिए उन्होंने 14 अप्रैल से धरना प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है

इटौंजा में रेलवे स्टेशन बनाने की मांग को लेकर करेंगे आंदोलन तिरंगा महाराज

बीकेटी विधानसभा क्षेत्र के इटौंजा में रेलवे स्टेशन बनाने के लिए आंदोलन करने का निर्णय लिया है
तिरंगा महाराज ने छेत्र की समस्याओं पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की घोषणा के बाद भी अभी तक इटौंजा में रेलवे स्टेशन बनना नहीं शुरू हुआ है और ना ही इसकी कोई प्रक्रिया शुरू हो पाई है सीतापुर रेल मार्ग को बड़ी लाइन में तब्दील करते समय इटौंजा रेलवे स्टेशन का स्वरूप बदल कर उसे रेलवे हाल्ट में तब्दील कर दिया गया था इटौंजा में रेलवे स्टेशन का स्वरूप बनाए रखने की मांग को लेकर स्थानीय नागरिकों के द्वारा व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया गया था पूर्व सांसद कौशल किशोर ने भी इस मामले को लेकर रेल विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा और इसके बाद तत्कालीन रेलवे अधिकारियों ने करीब 2 साल पहले इटौंजा को क्रॉसिंग रेलवे स्टेशन बनाए जाने की घोषणा की थी लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है इटौंजा को रेलवे स्टेशन बनाने की मांग को लेकर अनशन करने वाले मदन मोहन मिश्रा आलोक पाण्डेय बालक राम दिनेश कुमार राधेश्याम गुप्ता चंद्रशेखर दिनेश कश्यप सुधाकर अवस्थी अजीत शर्मा आदि का कहना है अगर जल्द ही रेलवे स्टेशन बनाने को लेकर तिरंगा महाराज के नेतृत्व में नागरिक जन आंदोलन करने को मजबूर हैं इस संबंध में तिरंगा महाराज ने अधिकारियों को पत्र के माध्यम से सूचना दी है फिलहाल इटौंजा क्षेत्र में स्टेशन ना बनने से स्थानीय लोगों में काफी रोष दिख रहा है और स्टेशन बनाने की मांग उठ रही है क्षेत्र के नागरिको का कहना है कि नेता लोग सिर्फ घोषणा कर देते हैं और उसके बाद कोई देखने नहीं आता है हम सभी लोगो को समस्याओं का सामना करना पड़ता है

सरकारें बदलती रही पर नहीं बदला इटौंजा क्षेत्र का भाग्य उपेक्षा के साथ बदहाल होता गया इटौंजा

देश और प्रदेश में सरकारें बदलती रही पर नहीं बदला इटौंजा क्षेत्र का दुर्भाग्य सभी सरकारों ने इटौंजा को उपेक्षित करने में कोई कोर कसर नही छोड़ी गई है। इस विकास युग मे इसे हर तरफ से उपेक्षित किया गया । लखनऊ – सीतापुर मार्ग पर इन दोनों जिलों का सीमावर्ती यह लखनऊ का ग्रामीणांचल इस मार्ग की रौनक हुआ करता था। अब चाहे सड़क वाला राजमार्ग हो उस पर पुल बनाकर इसकी रंगत बिगाड़ दी गयी। इतना ही नही टोल टैक्स बहरगांव व अर्जुमपुर के बीच कोई कट नही छोड़ा गया। थाना चौराहा इटौंजा पुल के नीचे एक संकरी पुलिया बनी भी है तो वह कई जिलों को जोड़ती है। सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, हरदोई को जोड़ने वाली इस संकरी पुलिया पर वाहनों के रैला से समय पर निकलना आसान बात नही।
उधर रेलमार्ग पर छोटी लाइन से बड़ी लाइन के विकास की आस में क्षेत्रवासियों को स्टेशन से हाल्ट नसीब हुआ। नतीजा यह हुआ कि कभी चहकने वाले रेल पड़ाव पर खामोशी व वीरानी फैल गयी। रेलवे क्वार्टर, स्टेशन के पीछे वाली अतिविकसित कही जाने वाली सड़क जर्जर अवस्था मे पहुंचकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। गिनी चुनी ट्रेनों के टाइम हाल्ट पर यात्री टिकट खिड़की खुलती है और यात्री ट्रेन पकड़ कर गंतव्य की ओर चले जाते हैं। यहां रात और भी भयावह, अंधेरे से भरी होती हैं।
नगर पंचायत इटौंजा की नाली, सड़कें व अन्य जनकल्याण तो भगवान भरोसे हैं। समझ नही आता किसी जमाने मे विकास की उचाइयां छूने वाला इटौंजा अर्श से फर्श पर क्यों है ? अब नेताओं के बयान की तरह यह मत कहना विकास हो रहा है। स्टेशन बनने वाला है, थाना चौराहा की पुलिया चौड़ी होने वाली है या दोनों तरफ आने जाने के लिए बनने वाली है। बसों के ठहराव के लिए बस स्टॉप बनने वाला है। स्टेशन के पीछे की सड़क बनने वाली है। ….. यह सब हो जाय तब विश्वास होगा।

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