बीजेपी-कांग्रेस MLA ने जताई नाराजगी:जल जीवन मिशन में गड़बड़ी; पीएचई मंत्री बोलीं – ‘हम खुद नाले का पानी पीते थे, समय लगेगा’

मध्यप्रदेश के 51 हजार से अधिक गांवों में हर घर को नल से जल उपलब्ध कराने वाली जल जीवन मिशन योजना में ठेकेदारों की लापरवाही के कारण ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों के विधायक आवाज उठा रहे हैं। बीजेपी विधायक उमाकांत शर्मा ने बीते शुक्रवार को विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने पाइपलाइन की खराब गुणवत्ता और सड़कों की मरम्मत न होने पर सवाल खड़े किए। पीएचई विभाग अब व्यवस्था में बदलाव करने जा रहा है ताकि ठेकेदारों द्वारा की जा रही गड़बडिय़ों पर रोक लगाई जा सके। भास्कर की खबर का असर: बिशनखेड़ी गांव पहुंची बोरवेल मशीन जल संकट से जूझ रहे इच्छावर विधानसभा के बिशनखेड़ी गांव में आखिरकार बोरवेल मशीन पहुंच गई। प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने भास्कर से बातचीत में आश्वासन दिया था कि जल्द ही गांव में ट्यूबवेल लगाया जाएगा। उनकी घोषणा के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी और अब गांव में जल संकट दूर करने के लिए बोरवेल खुदाई का कार्य शुरू हो गया है। गड़बड़ी पर होगी सख्त कार्रवाई पीएचई मंत्री संपतिया उईके ने कहा कि जल जीवन मिशन में यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो जानकारी दें, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब तक 10 से 12 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट कर उनसे वसूली की गई है।मंत्री ने कहा कि ठेकेदारों के काम का थर्ड-पार्टी मूल्यांकन अनिवार्य किया गया है। जब तक उनकी गुणवत्ता की पुष्टि नहीं होगी, तब तक भुगतान नहीं किया जाएगा। 2027 तक हर घर को मिलेगा नल से जल: पीएचई मंत्री पीएचई मंत्री संपतिया उईके ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत 2027 तक 100% काम पूरा कर लिया जाएगा। वर्तमान में 76% कार्य प्रगति पर है। गिरते जल स्तर को देखते हुए सरकार डैम बनाकर जल संकट का समाधान कर रही है और इन्हें जल जीवन मिशन से जोड़कर हर घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने ठेकेदारों की लापरवाही और पाइपलाइन में खामियों पर कहा कि स्थिति पहले से बेहतर हुई है। अधिकारी और विधायक मौके पर निरीक्षण कर रहे हैं, और जहां भी गड़बडिय़ां मिल रही हैं, उन्हें तत्काल सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। मध्यप्रदेश के 51,154 गांवों में से 18,000 से अधिक गांवों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो चुकी है। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस योजना का लाभ हर वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास जारी है और सरकार इसे पूरी तरह सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 51 हजार गांवों में पानी पहुंचाना जादू नहीं
मुंगावली विधायक और पूर्व पीएचई राज्य मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव ने कहा कि जल जीवन मिशन जैसी व्यापक योजना को पूरा करने में समय लगता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 में इस मिशन की घोषणा कर इसे तत्काल लागू किया, लेकिन 51 हजार से अधिक गांवों तक जल पहुंचाना एक दिन का कार्य नहीं है। गिरते जलस्तर से बढ़ी चुनौती यादव ने बताया कि पहले हैंडपंप और बोरिंग के जरिए जल आपूर्ति सुचारु थी, लेकिन जलस्तर गिरने से गहरे बोरिंग की आवश्यकता बढ़ गई है। सरकार अब तालाबों, नदियों और बांधों से जल आपूर्ति की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। मिशन में कोई लापरवाही नहीं होगी उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना हर नागरिक के जीवन से जुड़ी है, इसलिए इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है, और आने वाले समय में इसका लाभ ग्रामीणों को व्यापक रूप से मिलेगा। राजस्व मंत्री के इलाके में जल संकट
बिसनखेड़ी गांव में जलसंकट को लेकर स्थानीय विधायक और राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा- नल जल योजना से हम पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। वहां हमने ट्यूबवैल के लिए मशीन भेजी थी लेकिन, आपसी विवाद में बोरिंग नहीं हो पाई। आने वाले समय में हम नया ट्यूबवैल लगाएंगे।

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