कुमार विश्वास बोले- मैं अभागा सवर्ण, रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा:यूपी में भाजपा नेता ने सवर्ण सांसद-विधायकों को चूड़ियां भेजीं

यूपी में UGC के नए नियमों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। लखनऊ, वाराणसी समेत कई शहरों में सवर्ण समाज के लोग और छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया। इसके बाद 5 से ज्यादा भाजपा नेताओं ने भी इस्तीफा दे दिया। वाराणसी में प्रदर्शनकारियों ने ADCP की गाड़ी रोक दी। “हमारी भूल, कमल का फूल” जैसे नारे लगाए। इस दौरान उनकी पुलिस से झड़प हुई। BHU में विरोध कर रहे छात्रों ने कहा- क्या अब जाति देखकर मित्र बनाएं? रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजीं। फर्रुखाबाद में सवर्ण समाज के लोगों ने “गद्दी छोड़ो… अभी तो ये अंगड़ाई है… आगे और लड़ाई है…” जैसे नारे लगाए। अयोध्या के संत जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने पीएम मोदी को लेटर लिखकर नए नियमों को अन्यायपूर्ण बताते हुए इच्छामृत्यु की मांग की। कहा- अगर सरकार उनकी इच्छामृत्यु की मांग पूरी नहीं करती, तो यूजीसी के संशोधित नियमों को तुरंत वापस लिया जाए। इधर, विश्व बजरंग मंगल दल के राष्ट्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष डॉ. रवि राय भारद्वाज को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। कवि कुमार विश्वास ने X पर तंज कसा। लिखा- चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं… मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा। वहीं, पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह के विधायक बेटे प्रतीक ने लिखा कि समाज के एक वर्ग को ऐतिहासिक अपराधी बताकर वर्तमान में प्रतिशोध का शिकार बनाया जा रहा। मंत्री संजय निषाद ने कहा- कोई कानून लागू होते ही किसी समाज का नुकसान नहीं कर सकता। लागू होने के बाद अगर खामियां सामने आती हैं, तो उनमें संशोधन हो सकता है। पहले ही विरोध करना गलत है। विरोध की तस्वीरें देखिए- UGC के नए नियमों का विरोध क्यों? यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस, 2026।’ इसके तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा। आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। UGC विरोध को लेकर यूपी में क्या हो रहा, नीचे ब्लॉग में पढ़िए…

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