यूपी में पारा 40 डिग्री के पार पहुंचा:बांदा रहा सबसे गर्म, अगले 24 घंटे में एक्टिव होगा पश्चिमी विक्षोभ

उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में पिछले कई दिनों से जारी धुंध और कोहरे की समस्या से काफी हद तक राहत मिल गई। हालांकि प्रदेश के तराई और कुछ पश्चिमी जिलों में सुबह के समय हल्की धुंध देखी गई, लेकिन दिन चढ़ने के साथ आसमान साफ हो गया। धुंध हटने के बाद तेज धूप निकलने से तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई और कई शहरों में गर्मी का असर महसूस होने लगा। सीजन का सबसे गर्म शहर रहा बांदा
मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को प्रदेश में सबसे अधिक तापमान बांदा में दर्ज किया गया। यहां पारा 40.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके अलावा झांसी में अधिकतम तापमान 38.3 डिग्री सेल्सियस और उरई में 37.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं रात के तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिली और बांदा में न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रात दर्ज की गई। 15-16 मार्च को होगी बारिश
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने कहा – प्रदेश के मौसम में जल्द बदलाव देखने को मिल सकता है। उनके अनुसार उत्तर भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसका असर उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों पर पड़ने की संभावना है। उन्होंने कहा 15 और 16 मार्च को प्रदेश के तराई और पूर्वांचल क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। तस्वीरें देखिए-

क्या धुंध से फसलों को होगा नुकसान?
कृषि विशेषज्ञ विनोद पाण्डेय ने कहा – इस प्रकार के मौसम का रबी फसलों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। सरसों की फसल के लिए धुंध और नमी माहू कीट के प्रकोप के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती हैं। उन्होंने बताया कि माहू कीट पौधों की कोमल पत्तियों और तनों से रस चूसता है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं। इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है और फली व दानों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में कमी आ सकती है। हालांकि, उन्होंने बताया- यही मौसम गेहूं की फसल के लिए अपेक्षाकृत लाभकारी हो सकता है। वातावरण में हल्की ठंड और नमी से गेहूं के पौधों की वृद्धि और दानों के भराव की प्रक्रिया बेहतर होती है, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है। तेज धूप में बाहर निकलने से बचें
डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। किसानों के लिए मौसम मिलाजुला असर डाल सकता है। हल्की बारिश जहां फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, वहीं तेज गर्मी और हवाओं से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है। अगले 4 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम… अचानक धुंध की एक और वजह?
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव ने बताया- बिहार से मराठवाड़ा के बीच में लो-प्रेशर बना हुआ है। इस वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में सुबह के वक्त कोहरे जैसे हालात बन रहे हैं। हवा सतह से नीचे चल रही है। इसलिए तापमान में थोड़ी गिरावट देखी गई है, लेकिन दिन चढ़ने के साथ तापमान में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया- आगामी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की वजह से 14 मार्च से प्रदेश के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी। 15 मार्च से प्रदेश के तराई इलाकों के साथ-साथ पूर्वांचल के कुछ भागों में इस सीजन में पहली बार हल्की बारिश होगी। यह दौरान कुछ दिन चल चलेगा। बाद में तापमान में बढ़ोतरी शुरू होगी। मार्च में ही क्यों बढ़ रही है गर्मी?
स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। इसका असर यह है कि अब तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ने लगा है। गर्म दिनों की संख्या भी बढ़ रही है। कई बार लू (हीटवेव) का दौर भी पहले से ज्यादा दिनों तक चलता है। बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड भी टूटे हैं। कुछ जगहों पर तापमान 48 डिग्री से ऊपर तक दर्ज किया गया है। लंबे समय तक चल सकती है हीटवेव
IMD के अनुमान के अनुसार, इस साल कुछ इलाकों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि कई शहरों में लगातार कई दिनों तक तापमान बहुत ज्यादा रह सकता है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। कब मानी जाती है हीटवेव? मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाए या फिर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। ——————–

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *