मेरठ के नौचंदी मेले में पत्नी संग पहुंचे गौरव चौधरी:3 दिन पहले BJP नेता ने सपा सांसद धर्मेंद्र यादव की पूर्व पत्नी मोनिका से लिए थे सात फेरे

मेरठ के भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी रविवार शाम अपनी पत्नी के साथ नौचंदी मेले में पहुंचे। गौरव चौधरी ने इसी गुरुवार को समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव की पूर्व पत्नी मोनिका यादव से शादी की थी। दोनों ने हिमाचल प्रदेश में सात फेरे लिए थे। इस दौरान दोनों का परिवार मौजूद रहा। मोनिका यादव इस समय भाजपा में हैं और फर्रुखाबाद की जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। मोनिका यादव का आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव से 2016 में तलाक हो चुका है। गौरव चौधरी भी अपनी पूर्व पत्नी को तलाक दे चुके हैं। दोनों की ये दूसरी शादी है। एक साल से दोनों में बातचीत चल रही थी। दोनों की पहली मुलाकात मुख्यमंत्री आवास में हुई थी, इसके बाद दोनों एक-दूसरे के नजदीक आ गए। नौचंदी मेले में पहुंचने पर समर्थकों ने बुके देकर उनका स्वागत किया। मेला परिसर स्थित पटेल मंडप में हरियाणवी नाइट का कार्यक्रम चल रहा था। यहां उन्होंने मशहूर हरियाणवी कलाकार रेणुका पवार का डांस शो देखा। इसके साथ ही पति-पत्नी ने पूरे मेले का भ्रमण किया। इस दौरान दोनों को देखने के लिए मेले में आए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मेले के बारे में जानने में मौका मिला इस मौके पर मोनिका यादव ने कहा- आज मुझे मेरठ के ऐतिहासिक नौचंदी मेले में आने का मौका सिर्फ चौधरी साहब (गौरव चौधरी) की वजह से मिला है। वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी ने कहा – मेरा अपनी धर्मपत्नी मोनिका यादव को इस मेले में लाने का उद्देश्य यह है कि वह हमारे इस ऐतिहासिक मेले को देख सकें। हमारी पौराणिक संस्कृति को जान सकें। 2027 में चुनाव लड़ने पर उन्होंने कहा-अभी हम दोनों जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभा रहे हैं। हम दोनों ही भाजपा के कार्यकर्ता हैं। पार्टी जो भी आदेश देगी, उसी के अनुसार काम करेंगे। अब जानिए गौरव चौधरी-मोनिका यादव के बारे में…
पहले शादी की 2 तस्वीरें देखिए… मोनिका के पिता मुलायम सिंह के खास रहे मोनिका यादव पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव की बेटी हैं। नरेंद्र सिंह यादव 6 बार विधायक रहे। वे मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रह चुके हैं। नरेंद्र सिंह यादव ने 1985 में कांग्रेस के टिकट पर पहला चुनाव जीता था। बाद में समाजवादी पार्टी के गठन के दौरान वे मुलायम सिंह यादव के साथ चले गए। नरेंद्र सिंह यादव के पिता राजेंद्र सिंह यादव भी बड़े राजनेता रहे हैं। वह प्रजा समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में एक थे। उन्होंने यूपी सरकार में मंत्री के तौर पर भी काम किया। वे फर्रुखाबाद के शमशाबाद और मोहम्मदाबाद सीट से सात बार विधायक चुने गए थे। मोनिका यादव परिवार की तीसरी पीढ़ी की सदस्य हैं। 2021 में मोनिका यादव ने छोड़ी थी सपा मुलायम सिंह यादव से नजदीकी संबंधों की वजह से नरेंद्र सिंह यादव ने बेटी मोनिका की शादी अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव के साथ की थी। हालांकि शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों के बीच रिश्ता खराब हो गया। धर्मेंद्र से रिश्तों में तल्खी के बीच 2016 के पंचायत चुनाव में मोनिका उम्मीदवार बनाई गईं। लेकिन पार्टी की अंदरूनी राजनीति का शिकार हो गईं। उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसी बीच धर्मेंद्र ने मोनिका को तलाक दे दिया और दूसरी शादी कर ली। 2021 के पंचायत चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा। उन्हें भाजपा का समर्थन मिला तो जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने में कामयाब हो गईं। जर्मनी का बड़ा बिजनेस छोड़ मेरठ लौटे गौरव चौधरी
मेरठ के कुसेड़ी गांव के रहने वाले गौरव चौधरी की कहानी बेहद दिलचस्प है। साल 2006 में वह ‘बैचलर ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस’ की पढ़ाई करने जर्मनी गए थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह वहीं सेटल हो गए और कड़ी मेहनत से वहां होटल्स, रियल एस्टेट और होलसेल स्टोर्स का एक बहुत बड़ा बिजनेस खड़ा किया। बिजनेस शिखर पर था, लेकिन साल 2021 में अचानक मेरठ की माटी की खुशबू उन्हें भारत खींच लाई। भारत लौटने के महज 4 महीने बाद ही उन्होंने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और अपनी लोकप्रियता के दम पर निर्विरोध मेरठ के जिला पंचायत अध्यक्ष चुन लिए गए। मुख्यमंत्री आवास पर ‘विकास मॉडल’ की प्रेजेंटेशन के दौरान हुई थी पहली मुलाकात
इस जोड़े की प्रेम कहानी की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वजह से हुई थी। दरअसल, सीएम योगी ने 2021 में जिलों के विकास मॉडल को लेकर एक विशेष प्रेजेंटेशन कार्यक्रम रखा था। चूंकि गौरव चौधरी जर्मनी से इंटरनेशनल बिजनेस का बड़ा अनुभव लेकर आए थे। मोनिका यादव के पास मल्टीनेशनल कंपनी का कॉर्पोरेट अनुभव था, इसलिए मुख्यमंत्री ने दोनों को उनकी इसी काबिलियत और विजन की वजह से विशेष रूप से बुलाया था। यूपी के पंचायती राज व‍िभाग के कार्यालय में इस मीटिंग के दौरान दोनों की पहली मुलाकात हुई। विकास के मुद्दों पर शुरू हुई यह बातचीत धीरे-धीरे आगे बढ़ी। अब जानिए नौचंदी मेले का इतिहास…
नौचंदी मेला करीब 400 साल से आयोजित किया जा रहा है। इस मेले को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि मेले परिसर में एक ओर मंदिर स्थित है, जहां मान्यता है कि मंदोदरी पूजा करने आती थीं, जबकि दूसरी ओर एक मज़ार भी है। शुभारंभ के समय मंदिर में नारियल फोड़कर पूजा की जाती है, तो वहीं दूसरी ओर मज़ार पर चादर चढ़ाई जाती है। मेले के आयोजन की जिम्मेदारी एक बार जिला पंचायत और एक बार नगर निगम के पास रहती है। वैसे तो औपचारिक रूप से नवरात्र के बाद पूजा कर मेले का उद्घाटन कर दिया जाता है, लेकिन इस बार दुकानें लगने, झूले सजने और अन्य तैयारियों करने में समय लग गया। इस साल 13 मई को मेले का शुभारंभ प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह द्वारा किया गया था। इस साल मेला जिला पंचायत द्वारा आयोजित किया जा रहा है। ——— ये भी पढ़ें- कथावाचक देवकीनंदन बोले-एक लीटर पेट्रोल से सस्ती हिंदुओं की जान:अब मुसलमान गायों के लिए आंदोलन कर रहे; यही कलयुग है
देश में 1 लीटर पेट्रोल-डीजल से भी सस्ती दो चीजें हैं, पहली- गाय की हत्या और दूसरी- हिंदुओं की जान। अभी गाजियाबाद में 15 साल के बच्चे को चाकू से गोद दिया। हिंदुओं को कोई भी आता है, मारकर चला जाता है। इसका जिम्मेदार हिंदू ही है।’ ये बातें कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने रविवार को कहीं। पढ़िए पूरी खबर…

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