पति की लाश से पत्नी ने मांग में सिंदूर भरवाया:रोते हुए बोलीं- अब चूड़ियां कैसे उतारूं, प्रयागराज में 4 दोस्तों की हुई थी मौत

उन्नाव में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अनुपम से पत्नी ने आखिरी बार मांग में सिंदूर भरवाया। शनिवार सुबह अनुपम का शव उन्नाव से प्रयागराज उनके घर पहुंचा, तो पत्नी प्रिया बेसुध हो गईं। रोते-रोते शव के पास बैठ गईं। इसी दौरान एक महिला सिंदूरदान लेकर आई। रिश्तेदार ने अनुपम की उंगली पर सिंदूर लगाया, फिर प्रिया ने सिर झुकाकर अपनी मांग में सिंदूर भरवाया। इसके बाद पति के पैर छूकर प्रिया फूट-फूटकर रोने लगीं। कहने लगीं- चूड़ी लेकर आए थे हमारे लिए…अब इन्हें कैसे उतारूं…? यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मां भी बेटे शव से लिपट गईं। रोते हुए बोलीं- एक बार चेहरा दिखा दो। अब मेरा बेटा कभी नहीं मिलेगा। मैं तुम्हारे पैर पड़ती हूं, बस एक बार मुझे चेहरा देख लेने दो। दरअसल, शुक्रवार को उन्नाव में गंगा एक्सप्रेस-वे पर हुए सड़क हादसे में 4 दोस्तों की मौत हो गई थी। चारों शिमला घूमने जा रहे थे। इनमें प्रयागराज के रहने वाले अनुपम भी शामिल थे। शनिवार को चारों दोस्तों के शव उनके घर लाए गए। तीन दोस्त उदय, अनुपम और विजय का प्रयागराज के छतनाग घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। अमन कश्यप का अंतिम संस्कार प्रतापगढ़ स्थित उनके पैतृक गांव मांधाता में हुआ। 2 तस्वीरें देखिए- उदय को पिता और विजय को भाई ने दी मुखाग्नि शनिवार को सबसे पहले मां-बाप के इकलौते बेटे उदय सिंह की अर्थी घर से निकली। बेटे को अंतिम विदाई देते समय माता-पिता की हालत देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। पिता राम सिंह ने बेटे को मुखाग्नि दी। इसके बाद विजय कुमार की अर्थी उठी। विजय की चिता को बड़े भाई रोशन लाल ने मुखाग्नि दी। अनुपम गुप्ता के पिता अजय गुप्ता कोलकाता से दोपहर में प्रयागराज पहुंचे। इसके बाद अनुपम का अंतिम संस्कार किया गया। टाटा पंच से शिमला घूमने जा रहे थे फूलपुर थाना क्षेत्र के जाफरपुर बाबूगंज के रहने वाले अनुपम गुप्ता (32), उदय सिंह (28), विजय (40) और प्रतापगढ़ जिले के मांधाता के रहने वाले अमन कश्यप (28) दोस्त थे। 12 जून (शुक्रवार) की सुबह करीब 10 बजे टाटा पंच कार से शिमला घूमने निकले थे। अमन अपनी बुआ के घर बाबूगंज आया हुआ था। उसकी अभी शादी नहीं हुई है वहां से चारों दोस्त एक साथ शिमला के लिए रवाना हुए थे। दोपहर करीब साढ़े 3 बजे उन्नाव में गंगा एक्सप्रेस-वे पर सड़के के किनारे खड़े एक ट्रक में उनकी कार पीछे से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। अगला हिस्सा बुरी तरह पिचक गया। हादसे में चारों दोस्त की मौत हो गई। सभी सीटों से चिपक गए थे। दरवाजे काटकर चारों को कार से बाहर निकाला गया था। चारों दोस्तों का अपना कारोबार था अनुपम गुप्ता ने ग्रेजुएशन किया था। वह जाफरपुर बाबूगंज में गुप्ता मोबाइल एंड इंटरनेट नाम से दुकान चलाते थे। उनकी शादी हो चुकी है। उनकी पत्नी प्रिया मायके गई हुई थी। अनुपम की ससुराल भदरी कुंडा प्रतापगढ़ में है। शादी को 2 साल ही हुए थे। वहीं, विजय टेंट हाउस का बिजनेस करते थे। विजय ने भी ग्रेजुएशन किया था। उनके परिवार में पत्नी सुनीता और 2 बेटे मयंक-ईशांत और एक बेटी इशिका हैं। उदय पटेल उर्फ बाबूजी मां-बाप का इकलौते बेटे थे। उनकी फुटवियर की दुकान है। वह अपने पीछे पत्नी खुशी और 2 साल के बेटे आयुष को छोड़ गए हैं। उदय ने आईटीआई किया था। अपरेंटिस गुजरात से इफको कंपनी में की थी। एक साल पहले घर आए थे। यहां कारोबार करने लगे थे। क्या है परंपरा परंपरा के अनुसार, पत्नी को आखिरी बार पति के नाम का सिंदूर लगाया जाता है या पति के हाथों से उसकी मांग में सिंदूर भरवाया जाता है। इसे वैवाहिक जीवन के अंतिम प्रतीकात्मक क्षण के रूप में देखा जाता है। इसके बाद पत्नी की मांग का सिंदूर पोंछ दिया जाता है। हाथों में पहनी चूड़ियां उतार दी जाती हैं या तोड़ी जाती हैं। प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में इस परंपरा को आम बोलचाल में ‘सुहाग उतारना’ कहा जाता है। ————————– यह खबर भी पढ़ें- वाराणसी में जिला जज की कुर्सी पर बैठी महिला, हंगामा, बोली- आज मैं सुनवाई करूंगी, गवाह और सबूत पेश करिए वाराणसी में शुक्रवार सुबह 9 बजे जिला जज की कुर्सी पर एक महिला बैठ गई। कुर्सी पर बैठते ही हैमर पटकते हुए चिल्लाई- ऑर्डर-ऑर्डर। वकीलों से कहा- आज मैं जिला जज हूं। गवाह और सबूत पेश करिए। आज सारे मामले की सुनवाई मैं करूंगी। जो भी काम हो हमको बताया जाए। यहां पढ़ें पूरी खबर

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