सीतापुर। शहर के बाईपास पर स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत चयनित गरीब और मेधावी बच्चों को प्रवेश न दिए जाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। अभिभावकों की लगातार मिल रही शिकायतों और रोष का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। विद्यालय प्रशासन की इस मनमानी और अड़ियल रवैये पर नकेल कसने के लिए उन्होंने तत्काल प्रभाव से एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है। इस जांच समिति में जिला विकास अधिकारी, डायट खैराबाद के वरिष्ठ प्रवक्ता और हरगांव के खंड शिक्षा अधिकारी को शामिल किया गया है। समिति को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों की गहनता से पड़ताल करे। पारदर्शी और तथ्यपरक जांच पूरी करके समिति को अगले 20 कार्यदिवसों के भीतर अपनी स्पष्ट संस्तुतियों के साथ विस्तृत आख्या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपनी होगी। जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि आरटीई कानून के तहत पात्र बच्चों को दाखिला देना हर मान्यता प्राप्त निजी स्कूल का कानूनी कर्तव्य है। यदि जांच में विद्यालय द्वारा नियमों के उल्लंघन या गरीब बच्चों के प्रवेश में जानबूझकर रोड़ा अटकाने की पुष्टि होती है तो किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे में विद्यालय की मान्यता रद्द करने समेत कठोरतम विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। जिससे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अन्य संस्थानों को भी कड़ा संदेश मिल सके।
