उन्नाव। सीएमओ कार्यालय में जिले की 51 पैथोलॉजी का पंजीकरण है। बिना पंजीकरण और मानकों की अनदेखी कर जिले में सैंकड़ों पैथोलॉजी का संचालन हो रहा है। इनमें 40 से अधिक निजी पैथोलॉजी तो केवल जिला अस्पताल के सामने से लेकर एक किमी. दायरे के अंदर ही संचालित की जा रही हैं।जिले के गली-मोहल्लों में निजी पैथोलॉजी का संचालन किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहर में भी बिना पंजीकरण के संचालित हो रही हैं। सीएमओ कार्यालय में जिले की केवल 51 पैथोलॉजी का ही पंजीकरण है। इन केंद्रों में अधिकांश जगह संचालन के मानक पूरे नहीं हैं। संचालन के लिए पैथोलॉजिस्ट का मौजूद होना जरूरी होता है, लेकिन अधिकांश जगह डॉक्टर नहीं रहते। इनकी अनुपस्थिति में लैब टेक्नीशियन ही रिपोर्ट बनाते हैं। ऐसे में कुछ जांच रिपोर्टों में गड़बड़ी की संभावना रहती है। वहीं, डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालन के लिए रेडियोलॉजिस्ट का होना अनिवार्य है, लेकिन तमाम निजी पैथोलॉजी संचालक विभाग को गुमराह करने के लिए कलेक्शन सेंटर के नाम से पैथोलॉजी का संचालन कर रहे हैं। गलत जांच रिपोर्ट आने से मरीजों का सही इलाज नहीं हो पा रहा।सीएमओ डॉ. एचएन प्रसाद ने बताया कि एक पैथोलॉजिस्ट के दस्तावेज पर दो से तीन लैब के संचालन के निर्देश हैं। जांच रिपोर्ट में पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर होना जरूरी है। मानकों की अनदेखी करने पर जांच के बाद कार्रवाई की जाती है। अभियान चलाकर जांच कराई जाएगी। इसके बाद मानक और पंजीकरण न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
चल रहा है कमीशन का खेल
जिला अस्पताल और सीएचसी में पेट से संबंधित मरीजों को चिकित्सक अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं। यहां तैनात कुछ स्वास्थ्य कर्मी और डॉक्टर निजी जांच केंद्रों से संपर्क बनाए हुए हैं। मरीज जब जांच कराने केंद्र पर पहुंचता है तो उससे भेजने वाले का नाम पूछा जाता है। इसके बाद जांच का कुछ प्रतिशत कमीशन संबंधित भेजने वाले को भी दिया जाता है।
