विद्युत उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति संकल्पित एनटीपीसी ऊंचाहार

संवाददाता।

रायबरेली। इस साल का पर्यावरण दिवस प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने की थीम पर आधारित है। एनटीपीसी ऊंचाहार निरंतर प्रदूषण कम करने के लिए प्रयासरत रहा है। उत्पादन में बढ़ोत्तरी, ग्रीन हाउस गैस की गहनता को कम करना पर्यावरण के प्रबंधन पर एनटीपीसी का दृष्टिकोण है। स्थापना काल से ही एनटीपीसी ने इस मुद्दे पर आगे बढ़कर नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है। एनटीपीसी ऊंचाहार विद्युत परियोजना की कुल उत्पादन क्षमता 1560 मेगावॉट है जिसमे 10 मेगावॉट का सोलर विद्युत प्रोजेक्ट ग्राम अरखा में स्थापित किया गया है।कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख अभय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्लास्टिक की समस्या निरंतर बढ़ती जा रही है इसको यथा शीघ्र हमें रोकना जरूरी है। हमने अपने प्लांट और टाउनशिप मैं एकल उपयोग प्लास्टिक को पूर्णत: प्रतिबंधित किया है। हम जब भी खरीदारी करने बाजार जाएं तो अपने साथ कपड़े का थैला साथ जरूर रखें जिससे अनावश्यक प्लास्टिक अपने घर में आने को रोका जा सके। चलिए हम सब मिलकर ये प्रण लेते हैं कि सिंगल यूज प्लास्टिक के थैले को पूर्णत: प्रतिबंधित करेंगे।
कोयला जलने की वजह से सल्फर डाइआॅक्साइड, नाइट्रोजन आॅक्साइड और पार्टिक्युलेट मैटर उत्सर्जित होता है। इसके रोकथाम के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा निदेर्शों के अनुरूप तय मानक के अनुसार करना है। इस उत्सर्जन को कम करने के लिए हमारे इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर को अपग्रेड करना पड़ा और हमारी सभी छह इकाइयों में इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर को अपग्रेड कर दिया गया है। इस प्रकार एनटीपीसी ने तय मानक के अनुसार पार्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन कंट्रोल कर लिया।
इसी तरह सल्फर डाइआॅक्साइड कंट्रोल करने के लिए एनटीपीसी ने सभी इकाइयों में फ्लू गैस डी सल्फराइजेशन प्लांट लगाये है। सभी विद्युत इकाइयों के फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन प्लांट तैयार हो चूके हैं और इनका संचालन शुरू हो गया है।कोयला जलने की वजह से हवा में कार्बन डाइआॅक्साइड भी उत्सर्जित होता है। इस उत्सर्जन को कम करने के लिए एनटीपीसी ऊंचाहार के आस-पास के क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित किया गया है। जहाँ-जहाँ संभावनाएं रहीं है वहाँ पेड़ पौधे लगाए गए हैं। एनटीपीसी ऊंचाहार अपने आसपास के गांवों में भी वृक्षारोपण करते आया है। एनटीपीसी ऊंचाहार ने सामाजिक वानिकी उत्तर प्रदेश सरकार रायबरेली के सहयोग से अभी तक 14.5 लाख पौधे लगाए हैं। जिसकी वजह से कार्बन डाइआॅक्साइड शोषित हो कर हवा में आॅक्सीजन की मात्रा बढ़ाए जाने का काम लगातार किया जा रहा है।
सीएसआर और पर्यावरण विभाग द्वारा आसपास के गांवों के तालाबों का पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण का भी काम किया गया है। कैथवल और बिकई गांव के तालाबों का जीर्णाेद्धार पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण कराकर पुनर्जीवित किया गया है। जिसकी वजह से तालाब के पानी भरने की क्षमता बढ़ गई है। और गांव वालों के लिए भी यह एक सुन्दर सी जगह घूमने फिरने के लिए बन गई है। इसी कड़ी में भवानीदीनपुर गांव के तालाब का भी जीर्णाेद्धार का काम शुरू किया गया है और इसे जल्दी ही पूरा कर इस साल के अंत तक मुरार मऊ ग्राम पंचायत को सौंपा जाएगा।
प्लांट से किसी भी तरह का प्रदुषित पानी गंगा नदी में नहीं जाता है। इसके रोकथाम के लिए उचित कदम उठाए गए हैं। टाउनशिप में हमारा दो एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट एम बी बीआर टेक्नोलॉजी में कार्यरत है। ऐश वॉटर सकुर्लेशन सिस्टम भी कार्यरत हैं। प्लांट से निकलने वाले गंदे पानी को भी हम प्लांट के अंदर ही ट्रीटमेंट करके उसको पुन: उपयोग में लेते हैं। इसके लिए हमने दो इटीपी प्लांट लगाए हुए हैं। इटीपी मे ट्रीटेड किया हुआ एफ़्फ़्लुएंट हम सर्विस वाटर या फिर ऐश वाटर रीसकुर्लेशन मे इसका उपयोग करते है। इस तरह हमने जीरो लिक्विड डिस्चार्ज को अपनाया है।

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