महाभारतकालीन मंदिर में तड़के से जलाभिषेक, शिवलिंग की प्रथम पूजा का रहस्य आज भी बना हुआ है आस्था का केंद्र
ब्यूरो चीफ उमेश द्विवेदी
पुरवा, उन्नाव। सावन के प्रथम सोमवार पर पुरवा-मौरावां मार्ग स्थित महाभारतकालीन बाबा बिल्लेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार तड़के से ही शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक किया तथा परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।पुरवा तहसील मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित बाबा बिल्लेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र के प्रमुख शिवधामों में माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के साथ यहां रात्रि विश्राम किया था और स्वयं मिट्टी का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की थी। इसी दौरान अर्जुन ने अपने बाण से जलधारा प्रकट की थी, जो आज भी मंदिर के सामने स्थित धनुषाकार सरोवर के रूप में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।मंदिर से जुड़ी एक अन्य प्राचीन मान्यता भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। कहा जाता है कि शिवलिंग की पहली पूजा आज भी अजर-अमर अश्वत्थामा द्वारा की जाती है। इसी कारण तड़के मंदिर का कपाट खुलने पर शिवलिंग पहले से पूजित अवस्था में मिलता है। इस रहस्य को लेकर भक्तों में गहरी श्रद्धा और विश्वास है।
सावन के प्रथम सोमवार पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए। दर्शन के लिए बैरिकेडिंग और कतारबद्ध व्यवस्था बनाई गई, वहीं पेयजल, और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था रही। सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस बल भी पूरे समय तैनात रहा।
मंदिर परिसर में स्थित धनुषाकार सरोवर, जिसे पाप क्षय कुंड के नाम से जाना जाता है, श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। बड़ी संख्या में बच्चों ने सरोवर में स्नान कर भगवान बिल्लेश्वर महादेव के दर्शन किए। मुख्य मंदिर के चारों ओर बने एक दर्जन प्राचीन मंदिर और सरोवर के बीच स्थित मंदिर परिसर की भव्यता ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई।
सावन के प्रथम सोमवार पर देर शाम तक श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना जारी रहा और पूरा क्षेत्र शिवभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
