शहर में छापेमारी, ग्रामीण इलाकों में खामोशी क्यों? होटल में बन रही मिठाइयों की जांच कब?,
पुरवा/भगवंतनगर। त्योहारों के बीच मिलावटी मिठाइयों का कारोबार लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। उन्नाव में खाद्य विभाग लगातार होटल, ढाबों और खाद्य प्रतिष्ठानों पर नमूने लेने की कार्रवाई कर रहा है। हाल में विभाग ने कई प्रतिष्ठानों से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए और खराब सामग्री नष्ट भी कराई।लेकिन पुरवा और भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में संचालित होटलों और मिठाई बनाने वाले प्रतिष्ठानों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग को मिलावट के खिलाफ अभियान चलाना है तो जांच की आंच गांव-कस्बों तक भी पहुंचनी चाहिए।सवाल यह है कि आखिर ग्रामीण क्षेत्र के होटलों में बनने वाली मिठाइयों की नियमित जांच क्यों नहीं दिखाई देती? क्या खाद्य विभाग को शिकायत का इंतजार है या फिर बिना शिकायत के भी औचक निरीक्षण की व्यवस्था है?
जब उन्नाव में खाद्य विभाग द्वारा होटल-ढाबों और खाद्य प्रतिष्ठानों से नमूने लेकर कार्रवाई की जा रही है, तो पुरवा और भगवंतनगर के ग्रामीण बाजारों में भी खोया, पनीर, और तैयार मिठाइयों के नमूने लेकर जांच क्यों नहीं कराई जा रही ग्रामीण उपभोक्ताओं का सवाल सीधा है—क्या शुद्ध मिठाई खाने का अधिकार सिर्फ शहर के लोगों का है?खाद्य विभाग को चाहिए कि पुरवा और भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में अभियान चलाकर होटलों और मिठाई निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण करे। यदि सब कुछ मानकों के अनुरूप है तो जांच से डर कैसा, और यदि गड़बड़ी है तो कार्रवाई से परहेज क्यों?अब देखना यह है कि खाद्य विभाग ग्रामीण इलाकों में जांच का अभियान कब शुरू करता है या फिर मिलावट के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ कागजों और चुनिंदा प्रतिष्ठानों तक ही सीमित रहती है।
