ललऊ खेड़ा चौकी के अन्दर मारपीट चौकी पुलिस पर गम्भीर आरोप

-उन्नाव एआरटीओ प्रकरण में गंभीर सवाल, दही थाने से वाहन रिलीज होने पर उठे प्रश्न

उन्नाव:मृत बताए जा रहे वाहन स्वामी के नाम से दस्तावेज तैयार करने का आरोप, ललऊखेड़ा चौकी में मारपीट के बाद रोहित वर्मा को साथी ले जाने का दावा

उन्नाव। एआरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मामला वाहन संख्या UP35 AC 4189 से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता अनुराग यादव का आरोप है कि वाहन की जांच के दौरान चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था, दस्तावेजों में कमियां मिली थीं और चेसिस नंबर में भी अंतर पाया गया था। इसके बाद एआरटीओ टीम ने वाहन को सीज कर दही थाना परिसर में खड़ा कराया था। आरोप है कि बाद में संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर वाहन को रिलीज करा लिया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वाहन का पंजीकृत स्वामी मृत बताया जा रहा है तो वाहन छुड़ाने के लिए सहमति, शपथपत्र और अन्य दस्तावेज किसने तैयार किए। इन दस्तावेजों का सत्यापन किस अधिकारी ने किया और किस आधार पर वाहन रिलीज करने का आदेश जारी किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूरे प्रकरण में दस्तावेजों की जांच-पड़ताल में गंभीर लापरवाही बरती गई।

पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए चलाता था वाहन

भगौतीखेड़ा निवासी अनुराग यादव के अनुसार वह अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए वाहन चलाता था। उसका कहना है कि इंद्रानगर निवासी रोहित वर्मा ने उसे करीब 6,500 रुपये प्रतिमाह पर वाहन चलाने के लिए रखा था।

शिकायत के अनुसार 4 जुलाई 2026 को वाहन कठोरा से शिक्षकों को लेकर लौट रहा था। दरोगाखेड़ा के पास एआरटीओ टीम ने वाहन को रोककर जांच की। आरोप है कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था, दस्तावेजों में कमियां थीं और चेसिस नंबर भी अभिलेखों से अलग मिला। इसके बाद वाहन को सीज कर दही थाना परिसर में खड़ा करा दिया गया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में वाहन को छुड़ाने के लिए संदिग्ध लाइसेंस और अन्य कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और इन्हीं के आधार पर एआरटीओ कार्यालय से रिलीज आदेश जारी करा लिया गया।

दही थाना पुलिस की भूमिका पर भी सवाल

वाहन दही थाना परिसर में खड़ा होने के कारण अब पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि थाना परिसर से वाहन बाहर जाने से पहले रिलीज आदेश और प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन किया जाना चाहिए था। सवाल यह है कि वाहन किस आदेश के आधार पर और किन दस्तावेजों के आधार पर थाना परिसर से बाहर गया।

ललऊखेड़ा चौकी में 21 अगस्त को हुआ विवाद

इसी वाहन प्रकरण को लेकर 21 अगस्त की शाम करीब 3:30 बजे अनुराग यादव और रोहित वर्मा को पूछताछ के लिए ललऊखेड़ा चौकी बुलाए जाने की बात सामने आई। अनुराग अपनी पैरवी के लिए रामशंकर को साथ लेकर चौकी पहुंचा था।

रामशंकर के अनुसार चौकी में आरक्षी विकास गंगवार वाहन संख्या UP35 AC 4189 से संबंधित जानकारी अपने मोबाइल पर देख रहे थे। इसी दौरान पूछताछ के दौरान रोहित वर्मा के साथ कथित मारपीट के बाद उसके बेहोश होने का आरोप लगाया गया।

रामशंकर ने स्पष्ट किया है कि पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट नहीं की। बल्कि कुछ पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव कर उसे बचाने का प्रयास किया। इसी दौरान बीच-बचाव करने वाले पुलिसकर्मियों को भी चोटें आने का आरोप है।

बजरंग सेना से जुड़े लोगों पर मारपीट का आरोप

रामशंकर का आरोप है कि रोहित वर्मा के साथी, जिनमें बजरंग सेना से जुड़े ज्ञानू श्रीवास्तव, अन्ना नाम से पहचाने जाने वाले पत्रकार तथा उनके अन्य साथी शामिल थे, चौकी के अंदर पहुंच गए। आरोप है कि इन लोगों ने चौकी परिसर के अंदर रामशंकर के साथ मारपीट की।

रामशंकर के अनुसार मारपीट में उसके सिर में गंभीर चोट आई, जिसके बाद हालत गंभीर होने पर उसे कानपुर रेफर किया गया। उसका यह भी आरोप है कि घटना के दौरान रोहित वर्मा को उसके साथी पुलिस चौकी के अंदर से अपने साथ लेकर चले गए। यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो चौकी परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश, मारपीट और पुलिस की मौजूदगी में किसी व्यक्ति को चौकी से बाहर ले जाने की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

दूसरे बीट के आरक्षियों की मौजूदगी पर भी प्रश्न

रामशंकर ने आरोप लगाया है कि घटना के समय चौकी में मौजूद कुछ आरक्षियों की तैनाती संबंधित बीट क्षेत्र में नहीं थी। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि दूसरे बीट क्षेत्र में तैनात आरक्षी ललऊखेड़ा चौकी पर किस आदेश अथवा ड्यूटी के तहत मौजूद थे।

अब मामले में एआरटीओ के रिकॉर्ड, वाहन रिलीज आदेश, कथित दस्तावेजों की सत्यता, दही थाना परिसर से वाहन निकलने की प्रक्रिया, ललऊखेड़ा चौकी की सीसीटीवी फुटेज और घटना के समय मौजूद पुलिसकर्मियों की ड्यूटी का विवरण महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।

शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। फिलहाल लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। एआरटीओ विभाग, दही थाना पुलिस तथा अन्य संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले कीवास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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