वायरल वीडियो में पुलिस को खुलेआम गालियां दे रहा भाई, छत से रोड़े तान रहे पिता; कार्रवाई के बजाय प्रदर्शन की खुली छूट पर आक्रोश
आम आदमी होता तो अब तक हो चुकी होती जेल, रसूखदारों के आगे क्यों नतमस्तक हैं पुलिस के आलाधिकारी?
ब्यूरो चीफ: विपिन कुमार द्विवेदी
सुल्तानपुर/उत्तर प्रदेश:जनपद के धम्मौर थाना क्षेत्र के उघड़पुर गांव (अहिरन का पुरवा) में देर रात पुलिस दबिश के दौरान हुई घटना ने सुल्तानपुर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। एक तरफ जहां पुलिस जफरुल हसन नामक व्यक्ति के बेटे पर जानलेवा हमले के मामले में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत वांछित आरोपी संजय यदुवंशी को पकड़ने गई थी, वहीं दूसरी ओर मौके पर जो कुछ भी हुआ उसने कानून के इकबाल को तार-तार कर दिया है।
वायरल वीडियो ने खोली पोल: खाकी को सरेआम गाली और हमला
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जब पुलिस टीम रात में आरोपी के घर दबिश देने पहुंची, तो वांछित अपराधी संजय यदुवंशी के भाई शिवा यदुवंशी ने पुलिस टीम के सामने आकर खुलेआम अभद्र और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए गालियां दीं। हद तो तब हो गई जब आरोपी के पिता सियाराम यादव छत पर चढ़ गए और वहां से पुलिस टीम के ऊपर ईंट-गुम्मा (अड्डा) तानकर हमला करने की मुद्रा में दिखाई दिए।
कार्रवाई के नाम पर ‘धरना’, आम जनता में गहरा रोष
हैरानी की बात यह है कि खाकी का अपमान होने और पुलिस टीम पर हमला करने का प्रयास किए जाने के बावजूद सुल्तानपुर पुलिस मूकदर्शक बनी रही। आम जनता में इस बात को लेकर तीव्र आक्रोश है कि “यदि यही कृत्य किसी आम आदमी ने किया होता, तो पुलिस अब तक अपना रौब दिखाकर उसे घसीटते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेज चुकी होती।”
लेकिन इस मामले में न तो पुलिस को सरेआम गाली देने वाले भाई पर तत्काल कोई कड़ी कार्रवाई हुई और न ही हमलावर रुख अपनाने वाले पिता पर। उल्टा, आरोपी पक्ष को सोशल मीडिया के जरिए पुलिस पर ही आरोप लगाने और शहर के तिकोनिया पार्क में अनिश्चितकालीन प्रदर्शन व धरने का ऐलान करने का पूरा मौका दिया जा रहा है।
विवादों में घिरे आरोपी का पुराना रिकॉर्ड
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, संजय यदुवंशी के खिलाफ पहले से ही विभिन्न धाराओं में चार मुकदमे पंजीकृत हैं, जिसमें पूर्व में राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान का मामला भी शामिल है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा दिखाई जा रही कथित ढिलाई और लचर पैरवी से सुल्तानपुर पुलिस के आलाधिकारियों की मंशा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष है कि आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज है और विवेचनात्मक कार्रवाई के तहत ही टीम वहां गई थी। पुलिस ने परिजनों द्वारा लगाए गए अभद्रता के आरोपों को निराधार बताया है। बहरहाल, जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि जब ऑन-कैमरा पुलिस को चुनौती दी गई, तो पुलिस के हाथ कानून सम्मत सख्त कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहे हैं?
