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कडे़ नियम और ई टेंडरिंग लागू किए जाने की आशंका के चलते पार्षद विकास कार्य कराने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
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55 करोड़ का कोटा एक महीने से पड़ा, पार्षदों ने काम के प्रस्ताव ही नहीं दिए
लखनऊ। नए नगर आयुक्त के सख्त तेवर, 300 करोड़ की लागत से हुए विकास कार्याें की जांच, प्रस्ताव तैयार करने के कडे़ नियम और ई टेंडरिंग लागू किए जाने की आशंका के चलते पार्षद विकास कार्य कराने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। करीब एक महीने पहले सभी 110 वार्डों में सड़क, नाली खडंजा के कार्य कराए जाने के लिए पहले 55 करोड़ रुपये पार्षद कोटा जारी हो चुका, लेकिन काम शुरू होना तो दूर अभी प्रस्ताव तक तैयार नहीं हुए हैं। नगर निगम में 110 पार्षद हैं। जिनकी संस्तुति पर विकास कार्य कराने के लिए हर एक वार्ड के लिए 2.10 करोड़ सालाना का कोटा जारी किया है। इसकी पहली किस्त के तौर पर नौ मई को महापौर ने एक करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की थी। जिसके बाद नगर निगम प्रशासन की ओर से हर पार्षद से 50-50 लाख रुपये की लागत से विकास कार्य कराए जाने के प्रस्ताव मांगे गए थे लेकिन अब तक एक भी पार्षद ने प्रस्ताव नहीं दिया।
