नोएडा में बिना लीडर कैसे भड़के फैक्ट्री कर्मचारी:प्रशासन की बात श्रमिकों तक नहीं पहुंची, मांगें न मानने की अफवाह से हिंसक हुए

यूपी के नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले 3 दिन से फैक्ट्री कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार को प्रदर्शन हिंसक हो गया। आंदोलन कर रहे सैकड़ों कर्मचारी हाथ में डंडे-लाठी लेकर सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों ने अलग-अलग इलाकों में 350 से ज्यादा फैक्ट्रियों में पथराव और तोड़फोड़ की। 150 से ज्यादा गाड़ियां तोड़ीं। 50 से ज्यादा फूंक दीं। पुलिस की गाड़ियां पलट दीं। पुलिसवालों पर पथराव किया। 30 लोग चोटिल हो गए। पुलिस ने अब तक 60 लोगों पर केस दर्ज किया है। हिंसक प्रदर्शन से करीब 3000 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। फैक्ट्री मालिकों का दावा है कि श्रमिकों को उकसाया गया है। वहीं, प्रशासन और श्रमिकों के बीच गैप भी इस बवाल की एक वजह मानी जा रही है। दरअसल, रविवार को हुई बैठक के बारे में श्रमिकों को जानकारी ही नहीं दी गई थी। शांतिपूर्वक चल रहा श्रमिक आंदोलन बिना लीडर कैसे और क्यों भड़का? रविवार को बैठक में मांगें मानने के बाद भी प्रदर्शन क्यों हो रहा था? प्रशासन से कहां चूक हुई? क्या कामगारों को उकसाया गया था? पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले श्रमिकों के आंदोलन की वजह समझिए… फैक्ट्री कर्मचारियों में गुस्से की मुख्य वजह पड़ोसी राज्य हरियाणा का एक फैसला है। 9 अप्रैल को हरियाणा सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में फैक्ट्री कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी में 35% बढ़ोतरी करने का फैसला लिया। 10 अप्रैल को इसका नोटिफिकेशन जारी किया। जैसे ही यह खबर नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में फैली, यहां के कर्मचारी भी सैलरी बढ़ाने की मांग करने लगे। हरियाणा और यूपी में कर्मचारियों की सैलरी में कितना अंतर? हरियाणा– अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,275 से बढ़ाकर 15,220 रुपए, अर्द्धकुशल श्रमिकों का वेतन 12,430 से बढ़ाकर 16,780 रुपए और कुशल श्रमिकों का वेतन 13,704 से बढ़ाकर 18,500 रुपए किया गया। उच्च कुशल श्रमिकों का वेतन 14,389 से बढ़ाकर 19,425 रुपए किया गया। यह बढ़ोतरी लगभग 35 प्रतिशत है। अब पिछले 3 दिन का पूरा घटनाक्रम समझिए… अब प्रदर्शन के हिंसक होने की वजह समझिए… सोमवार को 400 फैक्ट्री कर्मचारी मदरसन कंपनी के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। इस आंदोलन का कोई लीडर नहीं था। कर्मचारी ही आंदोलन के लीडर थे। सुबह 9 बजे कर्मचारियों ने फैक्ट्री मालिकों और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। नारेबाजी के दौरान कर्मचारी कह रहे थे कि चार दिन से बैठे हैं, मगर हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही। हमारी मांगें मानी नहीं जा रहीं। इसी बीच किसी ने अफवाह उड़ा दी कि कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी जाएंगी। इसके बाद भीड़ उग्र हो गई। पथराव और आगजनी शुरू हो गई। नोएडा की कई इंडस्ट्री में श्रमिक अंदर घुस गए। जबरन काम बंद कराने लगे। फैक्ट्री में काम करने वाली लड़कियों को बाहर निकलने को कहा। भीड़ को देखकर लड़कियां डर गईं और बेंच के नीचे छिप गईं। जब उपद्रवी बाहर चले गए, तब लड़कियां कंपनियों से बाहर निकलीं। उन्हें घर भेजा गया। इसी बीच सोशल मीडिया पर भी आंदोलन को लेकर अफवाहें शुरू हो गईं। कर्मचारियों की मौत और घायल होने की फेक न्यूज चला दी गई। इससे कर्मचारी और भड़क गए। बिना किसी नेतृत्व के इतना बड़ा और संगठित हिंसक आंदोलन कैसे खड़ा हो गया? जांच एजेंसियां अब इसकी कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं। प्रशासन ने कहां चूक की, पढ़िए सुबह 9 बजे: मदरसन गेट से भड़की चिंगारी
आंदोलन की शुरुआत फेज-2 स्थित सेक्टर-81 की मदरसन कंपनी से हुई। सुबह 9 बजे 300-400 कर्मचारी गेट पर प्रदर्शन कर रहे थे। अचानक भीड़ उग्र हो गई। पुलिस के चार वाहनों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी गई। इसके बाद करीब 10 गाड़ियों को फूंक दिया। हालात संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। तुरंत पीएसी और आरएएफ को बुलाया गया। इसके बाद फेज-2 में अलग-अलग कंपनियों के बाहर छोटे-छोटे समूहों में बवाल शुरू हो गया। सुबह 10 बजे: श्रमिक सड़कों पर उतरे, ट्रैफिक जाम
एक घंटे के भीतर ही सेक्टर-1 से 6 तक काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। डीएससी रोड पर बैठकर नोएडा से दिल्ली जाने वाला ट्रैफिक रोक दिया गया। करीब एक घंटे तक जाम की स्थिति रही। हालांकि, पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए भीड़ को हटाकर रास्ता खुलवा दिया। इस दौरान मुख्य सड़कों पर जाम की स्थिति बन गई। दोपहर 1 बजे: सेक्टर-57 में 50 से ज्यादा फैक्ट्रियों में तोड़फोड़
दोपहर 12 बजे के बाद आंदोलन ने संगठित और हिंसक रूप ले लिया। करीब 600 लोग डंडे, बैट और पत्थरों के साथ सेक्टर-57 के बी-ब्लॉक पहुंचे। यहां एक-एक कर इंडस्ट्री को निशाना बनाया। महज 30 से 35 मिनट में 50 से ज्यादा फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की गई। मौके पर पहुंचा पुलिस बल नाकाफी साबित हुआ, जिसके बाद आरएएफ की तैनाती की गई। दोपहर 3 बजे: सेक्टर-63 में आगजनी
दोपहर करीब 3 बजे सेक्टर-63 में विपुल मोटर्स के बाहर खड़ी 12 गाड़ियों में आग लगा दी गई। लेबर चौक से लेकर सेक्टर-62, 63 और 65 तक फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की खबरें आती रहीं। दमकल की टीमों ने आग पर काबू पाया। उपद्रव में शामिल अधिकांश युवक 18 से 25 साल के बीच के थे। उनके हाथों में डंडे, पत्थर और पेट्रोल से भरी बोतलें थीं। कई युवक धुआं फैलाने के लिए रंगीन अनार (पटाखे) जला रहे थे। 3000 करोड़ का कारोबार ठप
नोएडा आंत्रप्रेन्योर्स एसोसिएशन के सुधीर श्रीवास्तव ने बताया- सुबह तक जहां 80% इंडस्ट्री सामान्य रूप से चल रही थीं। वहीं, दोपहर बाद अधिकांश औद्योगिक इकाइयां बंद हो गईं। कारोबारियों के मुताबिक, अचानक भीड़ फैक्ट्रियों में घुसी, काम बंद कराया और कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया। एक दिन में करीब 3000 करोड़ रुपए के कारोबार पर असर पड़ा। उनका कहना है कि श्रमिक आज भी हमारे साथ हैं। कल भी रहेंगे। उन्हें उकसाया गया है। अब पुलिस के एक्शन के बारे में जानिए-
यूपी के DGP राजीव कृष्ण ने बताया कि 50 से अधिक बॉट हैंडल चिह्नित किए गए हैं। इनकी जांच एसटीएफ करेगी। ये बॉट हैंडल पिछले 24 घंटों के भीतर बनाए गए। यहीं से नोएडा में श्रमिकों से जुड़े मुद्दे पर अफवाह फैलाने तथा भ्रामक नैरेटिव गढ़ने का प्रयास किया गया। प्रथम दृष्टया यह एक संगठित षड्यंत्र की ओर संकेत करता है। सभी हैंडल्स के डिजिटल ट्रेल की विस्तृत जांच एसटीएफ करेगी। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया- 83 स्थानों पर करीब 42 हजार श्रमिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। केवल दो स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक हुई। 78 स्थानों पर श्रमिकों को बातचीत कर शांतिपूर्वक हटा दिया गया था। बाहरी जिलों से आए कुछ लोगों ने माहौल को भड़काने और हिंसक बनाने की कोशिश की। ऐसे कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य की पहचान सीसीटीवी से की जा रही है। एडिशनल सीपी लॉ एंड ऑर्डर राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि अब तक 60 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। 200 लोगों को हिरासत में लिया गया है। ………………… ये खबर भी पढ़िए- नोएडा में हिंसक प्रदर्शन, 350 फैक्ट्रियों में तोड़फोड़:शोरूम के बाहर कारें फूंकी, 150 गाड़ियां तोड़ीं; योगी ने हाईलेवल कमेटी बनाई
नोएडा में सोमवार को फैक्ट्री कर्मचारियों ने हिंसक प्रदर्शन किया। 9 अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे 42 हजार कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों ने अलग-अलग इलाकों में फैक्ट्रियों में पथराव, तोड़फोड़ की। पढ़ें पूरी खबर

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