खरीफ फसल बीमा की अंतिम तिथि 14 अगस्त, ऋणी किसानों को 31 अगस्त तक मौक
– धान, बाजरा, उड़द, मूंग, तिल, अरहर, मिर्च व केला फसलें योजना में शामिल
फतेहपुर। शासन की ओर से वर्ष 2026-27 के खरीफ एवं रबी मौसम के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना की कार्ययोजना जारी कर दी गई है। जिले में योजना के संचालन के लिए यूनिवर्सल सोमपो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को नामित किया गया है। खरीफ मौसम में गैर ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 14 अगस्त 2026, जबकि ऋणी किसानों के लिए 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।
योजना के तहत प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों से फसल को होने वाले नुकसान पर बीमित किसानों को बीमा कवर एवं क्षतिपूर्ति प्रदान की जाएगी। खरीफ मौसम में जिले के लिए धान, बाजरा, उड़द, मूंग, तिल, अरहर, मिर्च एवं केला को अधिसूचित फसलों में शामिल किया गया है। अधिसूचना के अनुसार फसल की बुवाई न कर पाना, असफल बुवाई, फसल की मध्य अवस्था में नुकसान, खड़ी फसल को प्राकृतिक आपदाओं एवं रोगों से क्षति, ओलावृष्टि, जलभराव, बादल फटना, भू-स्खलन और बिजली गिरने से होने वाली क्षति को योजना में शामिल किया गया है। वहीं फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल को ओलावृष्टि, चक्रवात तथा बेमौसम/चक्रवाती वर्षा से होने वाले नुकसान के लिए भी निर्धारित अवधि तक बीमा कवर दिया जाएगा। योजना के अनुसार धान की बीमित राशि 87,600 रुपये प्रति हेक्टेयर है, जिस पर किसान अंश 2 प्रतिशत के हिसाब से 1,752 रुपये निर्धारित है। बाजरा की बीमित राशि 33,900 रुपये तथा किसान अंश 678 रुपये, उड़द की 47,100 रुपये तथा 942 रुपये, मूंग की 44,100 रुपये तथा 882 रुपये, तिल की 20,000 रुपये तथा 400 रुपये, अरहर की 77,000 रुपये तथा 1,540 रुपये निर्धारित की गई है। मिर्च की बीमित राशि 50,000 रुपये पर 2.5 प्रतिशत के हिसाब से 1,250 रुपये, जबकि केले की बीमित राशि 1.50 लाख रुपये पर 2.5 प्रतिशत के हिसाब से 3,750 रुपये किसान अंश निर्धारित किया गया है। पीड़ित किसानों से जिला प्रशासन ने अपील की है कि अत्यधिक वर्षा अथवा गंगा-यमुना नदियों में बाढ़ के कारण खेतों में फसल क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में तत्काल सूचना दें। किसान फसल बीमा कंपनी की हेल्पलाइन 14447 पर सूचना दे सकते हैं। इसके अलावा फसल बीमा कंपनी के कार्यालय अथवा उप कृषि निदेशक कार्यालय में 72 घंटे के भीतर प्रार्थना पत्र देकर फसल क्षति की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
