आरजीआईपीटी में ओरिएंटेशन प्रोग्राम 2026 का आयोजन

 

– अनुभवात्मक शिक्षा, नवाचार और उद्योग-अनुकूल कौशल विकास पर विशेष जोर

 

जायस, अमेठी |संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित राष्ट्रीय महत्व के संस्थान राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीआईपीटी) ने शनिवार को अपने जायस परिसर में ओरिएंटेशन प्रोग्राम 2026 का आयोजन किया। आरजीआईपीटी के निदेशक प्रो. हरीश हिरानी ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी शिक्षा को केवल पारंपरिक कक्षा शिक्षण, परीक्षाओं और ग्रेड तक सीमित नहीं रखा जा सकता। आज सूचना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साधन आसानी से उपलब्ध हैं, इसलिए विद्यार्थियों के लिए रचनात्मकता, जिज्ञासा, स्वतंत्र चिंतन, समस्या-समाधान क्षमता तथा अर्जित ज्ञान को वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में प्रयोग करने की योग्यता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।

प्रो. हिरानी ने आरजीआईपीटी के विकसित हो रहे शैक्षणिक मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning) और उद्योग अनुभव पर विशेष जोर दे रहा है। विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई के साथ इंटर्नशिप, औद्योगिक प्रशिक्षण और वास्तविक समस्याओं पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विद्यार्थियों और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए संस्थान द्वारा समर्पित ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट अधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है।

उन्होंने संस्थान की सुदृढ़ मेंटॉरशिप व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला। विद्यार्थियों के समूहों को संकाय सदस्यों से जोड़ा गया है, जो उनके मेंटॉर और स्थानीय अभिभावक के रूप में नियमित रूप से उनका मार्गदर्शन करेंगे। इसके साथ ही संस्थान इंडस्ट्री मेंटॉरशिप को भी बढ़ावा दे रहा है, जिसके अंतर्गत प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के अनुभवी पेशेवर विद्यार्थियों को करियर, नई तकनीकों और उद्योग की अपेक्षाओं के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

नवाचार और उद्यमिता को आरजीआईपीटी की नई शैक्षणिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान कर डिजाइन एवं इनोवेशन परियोजनाओं के माध्यम से उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उत्कृष्ट एवं संभावनाशील विचारों को संस्थान द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है तथा उन्हें आगे प्री-इन्क्यूबेशन और इन्क्यूबेशन के माध्यम से प्रोटोटाइप, पेटेंट और स्टार्ट-अप में परिवर्तित करने का अवसर दिया जाता है। स्नातक विद्यार्थियों को शोध कार्य, गुणवत्तापूर्ण शोध-पत्रों के प्रकाशन तथा पेटेंट के लिए भी प्रोत्साहित एवं सहयोग किया जा रहा है।

प्रो. हिरानी ने कहा कि आरजीआईपीटी पारंपरिक पेट्रोलियम अध्ययन के साथ-साथ व्यापक ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) के क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इनमें ग्रीन हाइड्रोजन, बायोगैस, नवीकरणीय ऊर्जा, वेस्ट-टू-एनर्जी, बायोरिफाइनरी, कार्बन प्रबंधन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा सतत प्रौद्योगिकियां प्रमुख हैं।

संस्थान के परिसर को धीरे-धीरे एक “लिविंग लैब” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां विद्यार्थी बायोगैस, अपशिष्ट प्रबंधन, जल शोधन एवं पुन: उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास से जुड़ी वास्तविक प्रणालियों से सीख सकें। शोध और प्रक्रिया अनुकूलन के माध्यम से आरजीआईपीटी की परिसर स्थित बायोगैस पहल में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा परिसर से उत्पन्न अपशिष्ट से तैयार गैस का उपयोग संस्थान की मेस में भोजन पकाने के लिए किया जा रहा है।

संस्थान अंतर्विषयक शिक्षा (Interdisciplinary Learning) को भी बढ़ावा दे रहा है, जिससे विद्यार्थी अपनी पारंपरिक शाखाओं की सीमाओं से आगे बढ़कर इंजीनियरिंग, कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों को एक साथ जोड़ते हुए वास्तविक समस्याओं के समाधान पर कार्य कर सकें।

नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए प्रो. हिरानी ने उन्हें खुले मन से सीखने, प्रश्न पूछने, नए विचार विकसित करने तथा संस्थान के संकाय विशेषज्ञों, उद्योग संपर्कों, अनुसंधान सुविधाओं और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

ओरिएंटेशन प्रोग्राम ने आरजीआईपीटी के उस दृष्टिकोण को रेखांकित किया, जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को केवल वर्तमान रोजगार के लिए नहीं, बल्कि तेजी से बदलते भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है—जहां ज्ञान को अनुभव से, शिक्षा को उद्योग से, अनुसंधान को अनुप्रयोग से और विचारों को नवाचार से जोड़ा जा सके।

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