क्राइम संवाददाता आशू सोनी
उन्नाव बीघापुर सड़क बढ़िया तो सब बढ़िया के दावे हो रहे फेलभगवंत नगर से चैनपुर को जोड़ने वाली सड़क इन दिनों विकास की तस्वीर कम और बदहाली की कहानी ज्यादा बयां कर रही है। करीब 5–6 महीने पहले मार्च में सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ। सड़क खोदी गई, गिट्टी बिछाई गई, लोगों को उम्मीद जगी कि अब सफर आसान होगा। लेकिन महीनों बीत गए और सड़क पर डामर की परत आज तक नहीं चढ़ सकी। नतीजा यह है कि निर्माणाधीन सड़क अब बड़े-बड़े गड्ढों में बदल चुकी है। बारिश के बाद स्थिति और खराब हो गई है। राहगीरों को यह पता नहीं रहता कि अगले कदम पर सड़क है या गड्ढा। इसी रास्ते से रोज भारी-भरकम ट्रक गुजरते हैं। स्कूली बच्चे इसी रास्ते से स्कूल आते-जाते हैं। किसान, बुजुर्ग, महिलाएं और आम नागरिक रोज जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस सड़क पर कई हादसे हो चुके हैं और हाल ही में एक महिला की सड़क दुर्घटना में जान भी चली गई थी। इसके बावजूद सड़क निर्माण की रफ्तार सवालों के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल ठेकेदार और निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर है। आखिर सड़क का काम शुरू होने के बाद इसे समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या ठेकेदार से जवाब मांगा गया? क्या काम की नियमित निगरानी हुई? अगर हुई तो फिर सड़क महीनों से अधूरी क्यों पड़ी है? पीडब्लूडी के जेई का कहना है कि जहां ज्यादा परेशानी है, वहां सूचना देने पर उसे ठीक कराया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि बरसात में डामर नहीं डाला जा सकता, इसलिए बरसात के बाद काम को देखा जाएगा।
लेकिन जनता का सवाल है—जब मार्च में काम शुरू हुआ था, तो बरसात आने से पहले काम पूरा कराने की कोशिश क्यों नहीं हुई? सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन भगवंत नगर–चैनपुर सड़क की तस्वीर उन दावों की जमीनी हकीकत दिखा रही है। जनता की मांग साफ है—सड़क का निर्माण जल्द पूरा हो, ठेकेदार की जवाबदेही तय हो, लापरवाही पर कार्रवाई हो और लोगों को सुरक्षित रास्ता मिले। क्योंकि सड़क विकास के लिए बनती है, लोगों की जिंदगी खतरे में डालने के लिए नहीं।
