‘चोली के पीछे क्या है गाने पर मार-मार के नचवाया’:सपा नेता के आरोप पर नए SSP का एक्शन, इंस्पेक्टर समेत 8 पुलिसवाले लाइनहाजिर

मेरठ में सपा नेताओं की पिटाई के आरोप के बाद इंस्पेक्टर समेत 8 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। नए SSP बीबीजीटीएस मूर्ति ने चार्ज संभालने के बाद तुरंत बाद एक्शन लिया। शुक्रवार को सपा नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। दिग्विजय भाटी चोटिल आंख पर पट्टी बांधकर आए। अपने घाव दिखाते हुए फूट-फूटकर रोए। कहा- हमें नहीं पता था कि SSP अविनाश पांडेय हमसे नफरत पालकर बैठे थे। उन्होंने हमें बूटों से मारा। तब तक पीटा, जब तक हम बेहोश नहीं हो गए। इसके बाद इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अखिलेश गौड़ को हमें सौंप दिया। वह हमें पुलिस लाइंस एसओजी ऑफिस ले आए। वहां बर्बरता की। हम बेहोश हो जाते थे तो होश में लाकर पीटते थे। दिग्विजय भाटी ने कहा- पुलिसवालों ने मोबाइल पर गाना बजाया- ‘चोली के पीछे क्या है…।’ हमसे बार-बार इस गाने पर नाचने को कहा। हम खड़े भी नहीं हो पा रहे थे, फिर भी हमें नचवाया जा रहा था। सब हम लोगों पर हंस रहे थे। हम हाथ जोड़ रहे थे, लेकिन किसी को तरस नहीं आया। हालांकि, मेरठ पुलिस ने आरोपों को निराधार बताया है। कहा था- दोनों हिस्ट्रीशीटर हैं। उनको चोटें स्कूटी से गिरने की वजह से आई हैं। दैनिक भास्कर ने जब इंस्पेक्टर अखिलेश से इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा- मैं तो वहां बाद में पहुंचा था। मुझे कप्तान साहब की ओर से जो आदेश दिया गया था, मैंने उसका पालन किया। मामले के तूल पकड़ने के बाद एडीजी मेरठ भानु भास्कर ने सहारनपुर DIG अभिषेक सिंह को मामले की जांच सौंपी है। शासन ने गुरुवार देर रात 9 आईपीएस का ट्रांसफर किया। इसमें SSP अविनाश पांडेय को हटाकर लखनऊ पुलिस हेडक्वार्टर से अटैच कर दिया। तस्वीरें देखिए- सपा नेता ने डॉ. दिग्विजय भाटी ने क्या आरोप लगाए थे, पढ़िए भारतीय किसान यूनियन (बीआर अंबेडकर) के अध्यक्ष दिग्विजय भाटी ने बताया कि 19 अगस्त को मैं और हमारे जिलाध्यक्ष मोहित SSP अविनाश पांडेय से मिलने गए थे। ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध प्रदर्शन मामले में पुलिस ने हम 8-10 लोगों को जेल भेज दिया था। हमारी कोई गलती नहीं थी और न ही हम प्रोटेस्ट में शामिल थे। इसलिए हम कप्तान साहब से अपनी बात रखने गए थे। जब हम SSP से मिले, तो वे भड़क गए। अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहने लगे- “40 रुपए का कुर्ता-पायजामा पहनकर नेता बन जाते हैं, हमसे टकराएंगे?” । जब हमने गाली देने का विरोध किया, तो एसएसपी अपने चैंबर में खींचकर ले गए और लात-घूसों, जूतों से हमारी पिटाई कर दी। इसके बाद सिविल लाइंस प्रभारी अखिलेश गौड़ से कहा कि देखते हैं कितनी खातिरदारी कर पाते हो। फिर वो हमें एसओजी (SOG) दफ्तर ले गए। बंद कमरे में हम दोनों के हाथ-पैर बांधकर डंडों से पिटाई की। रात 2 बजे जब अतुल प्रधान पहुंचे, तब हमें छोड़ा गया। शर्त रखी गई कि अगर मीडिया में बात आई, तो इससे बुरा हाल किया जाएगा। ‘SSP हमारे एनकाउंटर की योजना बना चुके थे’ दिग्विजय भाटी ने रोते हुए कहा- 8 जुलाई के प्रदर्शन में हम लोग शामिल नहीं थे, फिर भी हमें टारगेट किया गया। एक गरीब परिवार को न्याय दिलाने के लिए आगे आए थे। ऐसा ही अगर होता रहा, तो कोई भी किसी भी जरूरतमंद की मदद के लिए आगे नहीं आएगा। मोहित जाटव ने कहा कि वह अपने समाज के नेता हैं। ऑफिस जाने से पहले उनकी पुलिस अफसर से फोन पर बात हुई थी। जिस तरह का व्यवहार फोन पर था, उस तरह का व्यवहार सामने बिल्कुल नहीं था। SSP हमारे एनकाउंटर की योजना बना चुके थे। उन्होंने पुलिसवालों से कहा था कि एक गोली मेरे मारो और फिर इनका एनकाउंटर कर दो। मैं सब देख लूंगा। दिग्विजय पर मेरठ-अमरोहा में 10 और मोहित पर 7 मामले दर्ज पुलिस के मुताबिक, दिग्विजय सिंह भाटी पुत्र रघुराज सिंह निवासी चमरवा (संभल) और मोहित जाटव पुत्र सुरेश सिंह निवासी किनानगर (मेरठ) के खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं। दोनों अपने-अपने थानों के हिस्ट्रीशीटर हैं। दिग्विजय पर मेरठ और अमरोहा में 5-5 और मोहित पर मेरठ में 7 मामले दर्ज हैं। आखिरी में दिग्विजय भाटी-मोहित जाटव के बारे में जानिए
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