मंत्री निषाद का सवाल- फूलन देवी की सुपारी किसने दी:सपा से मोहभंग हुआ तो उनकी हत्या करवा दी गई, वह आइकॉन थीं

यूपी सरकार के मंत्री डॉ. संजय निषाद ने शुक्रवार को कहा- फूलन देवी की हत्या कराने वालों से सावधान रहें। फूलन देवी आइकॉन थीं। जब उनका सपा से मोहभंग हुआ और उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई, तब उनकी हत्या कर उनकी आवाज दबा दी गई। निषाद पार्टी अध्यक्ष ने कहा- सपा ने उनकी मौत की निष्पक्ष जांच की मांग क्यों नहीं की? डर था कि असली चेहरे बेनकाब हो जाएंगे? मछुआरा समाज अब ऐसे राजनीतिक धोखों को भूलेगा नहीं। हर धोखे का हिसाब लेगा। उनकी मौत की जांच होनी चाहिए। यह भी पता लगना चाहिए कि सुपारी किसने दी। मंत्री ने विधानसभा चुनाव को लेकर मछुआरा समाज से सतर्क रहने की अपील की। कहा- चुनावी सीजन शुरू हो गया है। जो साढ़े चार साल आपके सुख-दुख में नहीं आए, अब दरी बिछाने वाले वही सौदागर पंचायत के बहाने आपके आसपास बरसाती मेंढक की तरह कूदने लगे हैं। मंत्री का इशारा सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर है। दरअसल, हाल ही में अखिलेश ने निषाद समाज का खुद को सच्चा हितैषी बताया था। कहा था- सपा सरकार में निषाद समाज को मान-सम्मान, पहचान और अधिकार दिया। फूलन देवी को सपा ने ही रिहा करवाया था और दो बार सांसद बनाया था। संजय निषाद की 3 बड़ी बातें 1- फूलन देवी विद्रोह और न्याय की प्रतीक मंत्री निषाद ने कहा- फूलन देवी विद्रोह और न्याय की प्रतीक हैं। महिलाओं की प्रेरणा हैं। हर बहन को फूलन देवी बनना पड़ेगा। पहले का समय बंदूक का था। अब बटन का है। उनके साथ बहुत अन्याय हुआ है। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री से बात कर सुरक्षा की मांग की थी। कहा था- हम उत्तर प्रदेश में असुरक्षित हैं, हम दूसरे प्रदेश में रहेंगे। गारंटी लीजिए, तब तो मैं सरेंडर करूंगी, नहीं तो मैं अपने हथियार से अपना न्याय करूंगी। 2- फूलन देवी सपा के साथ आईं, बदले में मौत मिली संजय निषाद ने कहा- कांग्रेस ने वादा किया, लेकिन वादा भूल गई। इसके बाद फूलनदेवी सपा के साथ आ गईं। सपा ने उन्हें नेता और सांसद बनाया, लेकिन बदले में क्या मिला? मौत। फूलन देवी का जब सपा से मोहभंग हुआ तो उन्होंने ‘एकलव्य सेना’ बनाई। बाद में अपनी पार्टी बनाई। इसके 27 दिन बाद उनकी हत्या कर दी गई। जब उनका मोहभंग हुआ था तो इसकी वजह भी बताई जानी चाहिए। दूसरी पार्टी बनाने की जरूरत क्यों पड़ी, इसका जवाब भी मिलना चाहिए। फूलन देवी की प्रॉपर्टी पर सपा से जुड़े एक चौरसिया ने कब्जा कर रखा है। 3- ये मौसमी नेता हैं, सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हैं मंत्री ने कहा- अब निषाद जाग चुका है। अब वह कहीं किसी के बहकावे में आने वाला नहीं है। मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझी समेत पूरे मछुआरा समुदाय को ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा। ये मौसमी नेता हैं। घड़ियाली आंसू बहाते हैं, निषाद का वोट लेकर सत्ता में जाते हैं, फिर मछुआरा समाज को भूल जाते हैं। अपने लोगों को सब कुछ दे देते हैं। मछुआरा समाज की अब स्वतंत्र राजनीतिक पहचान निषाद पार्टी है। मछुआरा समाज किसी की दरी बिछाने वाली कौम नहीं है, बल्कि ओबीसी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली कौम है। ——————————————– ये खबर भी पढ़ें- ‘जज के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए’:यूपी में फांसी की 23 सजा सुनाने वाले जज का दर्द, पहले कहा था- मरना पसंद, डरना नहीं
एक जज का काम न्याय करना होता है, लेकिन अगर उसके साथ ही अन्याय हो तो वह कहां जाए? क्या जिला जज के प्रशासनिक नियंत्रण में काम कर रहा जज उनके ऐसे आदेशों को मानने के लिए बाध्य है, जो कानून के खिलाफ हों? यह टिप्पणी मुजफ्फरनगर के जज रवि कुमार दिवाकर ने गुरुवार (17 सितंबर) को 10 साल पुराने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के एक मामले में फैसला सुनाते हुए की। मामले में लंबे समय से कोर्ट के चक्कर काट रहे आरोपी को उन्होंने बरी कर दिया। पढ़ें पूरी खबर

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